गुंजन द्विवेदी की कहानी दिखाती है कि सफलता के लिए लंबे समय तक कड़ी मेहनत की जानी चाहिए। इसके अलावा और कोई उपाय भी नजर नहीं आता है. गुंजन द्विवेदी के पिता आईपीएस अफसर है. साथ ही उनकी बहन भी सिविल सेवा कार्यरत है. यही कारण था की गुंजन द्विवेदी को अपने घर में बड़ी अधिकारी बनने का प्रेरणा मिलती ही रहती थी. सफलता पाने में माहौल का बड़ा योगदान होता है।
इंटरमीडिएट के बाद 2014 में गुंजन द्विवेदी ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। 2016 में पहली बार प्री परीक्षा में असफल हो गई थी. हार नहीं मानी और 2018 में ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल की। उनका मानना है कि सफलता के लिए शॉर्टकट नहीं होता है. अगर आपको सफलता पानी है तो लंबे समय तक कड़ी मेहनत की आवश्यकता है। उन्होंने अपनी रणनीति में बेहतरी की और शॉर्टकट से दूरी बनाई।
उनकी सफलता में यह बात सबसे बड़ी योगदान साबित हुई की घर में सिविल सेवा को लेकर अच्छा माहौल रहा। गुंजन द्विवेदी ने इंटरमीडिएट के बाद यूपीएससी की तैयारी करने का निर्णय लिया। 2014 में ग्रेजुएशन कंप्लीट करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। जैसा की आप जानते है की साल 2016 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी।
पहली बार में उन्हें प्री परीक्षा में सफलता नहीं मिली। दूसरी बार में भी उन्हें प्री परीक्षा में अटक गई। 2018 में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल की। शॉर्टकट से सफलता प्राप्त करना असंभव है। गुंजन ने अपनी तैयारी के लिए खास रणनीतियों का उपयोग किया।
उन्होंने अपने कमियों को सुधारा और तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की। जो भी अभ्यर्थी UPSC को पास करना चाहते है उनकी सलाह है कि एनसीईआरटी की किताबें पढ़ें। साथ ही तैयारी के दौरान नियमित एनालिसिस करें। सफलता के लिए सही रणनीति बनाएं और बेहतर शेड्यूल का पालन करें। असफलताओं से सीखें और मंजिल तक पहुंचें। यूपीएससी में सफलता के लिए मेहनत ही एकमात्र जरिया होती है।